
विकास कुमार/सहरसा: आपने ब्रज और बरसाने की मनोरंजक और यादगार होली तो जरूर देखी होगी, लेकिन हम आपको सहरसा जिले के बनगांव में उन्नीसवीं शताब्दी से मनाई जाने वाली सामूहिक हुड़दंगी घुमौर होली का अद्भुत नजारा दिखाने जा रहे हैं, जहां हजारों की तादाद में विभिन्न गांवों के लोग एक जगह जमा होकर रंगों में डुबकियां लगाते हैं. हिन्दू-मुस्लिम और विभिन्व वर्ग जातियों के लोगों का हुजूम एक जगह जमा होकर आपसी भाईचारे और मैत्री का ऐसा परचम लहराते हैं, जिसे देखकर पूरे भारतवर्ष को गर्व होगा. इस होली की एक खास बात यह है की यह होली से एक दिन पूर्व ही मनाई जाती है. मिथिला पंचांग के अनुसार आज फागुन का आखिरी दिन है.
होली का हुड़दंग
इसलिए बनगांव की इस होली को फगुआ कहा जाता है, जबकि और जगहों पर कल और परसों होने वाली होली जो चैत मास में होगी. इसलिए उसे चैतावर होली कहा जाता है. बरसाने और नन्द गांव जहां लठमार होली संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है. वहीँ, बनगांव की घुमौर होली की परम्परा आज भी कायम है. इस विशिष्ट होली में लोग एक दूसरे के कंधे पर सवार होकर, लिपट-चिपट और उठा-पटक कर के रंग खेलते और होली मनाते हैं. बनगांव के विभिन्न टोलों से होली खेलने वालों की टोली सुबह 9 बजे तक मां भगवती के मंदिर में जमा होने लगती है और फिर यहां पर होली का हुड़दंग शुरू होता है, जो शाम करीब 4 बजे तक चलता है.
होली का आनंद
आज हम आपको सहरसा के कहरा प्रखंड अंतर्गत पड़ने वाले बनगांव लाये हैं. इस गांव में उन्नीसवीं शताब्दी 1810 ईसवी से ही अभूतपूर्व होली खेली जाती है. गांव के भगवती स्थान पर बच्चे-बूढ़े, जवान सभी एक जगह जमा होकर हुडदंगी घुमौर होली खेलते हैं. बनगांव भारत का एकलौता ऐसा गांव हैं, जहां चालीस हजार से ज्यादा ब्राह्मण जाति के लोग रहते हैं. इस गांव में 3 पंचायत है. यही नहीं खास बात यह भी है की ब्राह्मणों के साथ-साथ यहां विभिन्न जातियों के अलावे मुस्लिमों की भी अच्छी तादाद है. गांव के लोगों के अतिरिक्त आसपास के कई गांवों के लोग भी यहां आते हैं और होली का आनंद उठाते हैं.
होली का मजा
देखिये किस तरह सभी उम्र के लोग इस हुडदंगी होली में जान जोखिम में डालकर होली का मजा उठा रहे हैं. गांव के लोगों का कहना है की संत लक्ष्मीनाथ गोंसाईं ने होली की परम्परा की शुरुआत की थी, जिसे आजतक लोग बाखूबी निभा रहे हैं. इस होली में भारी तादाद में मुसलमान भाई शामिल होकर ना केवल इसका मजा कई गुना बढ़ा देते हैं, बल्कि इसे प्रेरणादायक भी बना डालते हैं. क्षेत्र के आमलोग और गांव की बच्चियां भी इस होली की खासियत बता-बताकर थक नहीं रही हैं. लड़कियों का कहना है की ऐसी होली पूरे भारतवर्ष में नहीं खेली जाती है. इस होली में यहां MLA, MP, मंत्री सहित देश के विभिन्य क्षेत्रों में ऊंचे पदों पर पदस्थापित क्षेत्रीय लोग भी आते हैं. सभी मिलकर यहां आज के दिन खूब मस्ती करते हैं.
होली की ढेर सारी शुभकामना
इस होली में सांसद, विधायक, आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, उद्योगपति से लेकर सभी स्तर के लोग शामिल होते हैं. इस हुडदंग में खुद को बचाना मुश्किल हो जाता है. देखिये रंगों के झरने में किस तरह से सभी लोग इस होली का मजा लूट रहे हैं. रंगों का यह ऐसा त्यौहार है की इसमें मना करने की कोई गुंजाईश नहीं है. यहां की होली पूरे देश को प्रेम और भाईचारे का सन्देश दे रहा है. देश के स्वाभिमान और समरसता का ऐसा नजारा कहीं भी देखने को नहीं मिल सकता है, जहां हिन्दू-मुस्लिम और सभी जातियों के लोग इस तरह मिलकर पर्व का आनंद एक साथ उठा रहे हों. आपसी द्वेष को खत्म कर प्रेम, भाईचारे से जिन्दगी की नयी शुरुआत करने के सन्देश देने वाले इस महान पर्व होली के सार्थक और आदर्श रूप सहरसा के बनगांव में निसंदेह आज भी सिद्दत से मौजूद हैं, जिससे पूरे देश को सीख लेनी चाहिए. लल्लूराम डॉट कॉम की तरफ से पूरे देशवासियों को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं.
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