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दमोह फर्जी डॉक्टर मामला: मानव अधिकार आयोग ने मौत के लिए जिला प्रशासन के अफसरों को माना जिम्मेदार, FIR में देरी पर जताई नाराजगी

दमोह फर्जी डॉक्टर मामला: मानव अधिकार आयोग ने मौत के लिए जिला प्रशासन के अफसरों को माना जिम्मेदार, FIR में देरी पर जताई नाराजगी

सुधीर दंतोडिया, भोपाल. दमोह मिशन अस्पताल में फर्जी डॉक्टर के इलाज से मौत के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने जिला प्रशासन के अफसरों को जिम्मेदार माना है. इसके अलावा आयोग ने देरी से FIR दर्ज करवाने पर नाराजगी जाहिर की है.

बता दें कि तीन दिन तक दमोह में मामले की जांच कर राष्ट्रीय मानव आयोग अब दिल्ली लौट गई है. आयोग की प्राथमिक रिपोर्ट में मौत के मामले में लापरवाही के लिए जिला प्रशासन के अफसरों को जिम्मेदार बताया गया है. आयोग का यह भी कहना है कि 20 फरवरी को शिकायत हुई तो 6 अप्रैल को एफआईआर क्यों कराई गई.

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दमोह मिशनरी अस्पताल में नरेंद्र विक्रमादित्य यादव नामक शख्स ने डॉ. एन जॉन केम के नाम से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की. उसने जनवरी-फरवरी 2025 में 15 से ज्यादा हार्ट सर्जरी की, जिनमें से 8 मरीजों की मौत हो चुकी है. जांच में पता चला कि उसकी डिग्री और अनुभव पूरी तरह से फर्जी थे.

इसे भी पढ़ें- जबलपुर पहुंची दमोह फर्जी डॉक्टर कांड की आंचः यहां के कई अस्पतालों में काम कर चुका है डॉ एन जॉन कैम, युवक कांग्रेस ने ज्ञापन सौंप की जांच की मांग

आरोपी फर्जी डॉक्टर एन. जान केम लोगों को मौत की नींद सुलाने के बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज भाग गया था. जिसके बाद एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने एक टीम प्रयागराज भेजी और आरोपी को गिरफ्तार किया. इतना ही नहीं आरोपी ने नागपुर से कूटरचित दस्तावेज बनवाए थे. वहीं एक डिग्री पर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के भी फर्जी साइन मिले थे.

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