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Rajasthan News: गुर्जर समाज में दाढ़ी वाले दूल्हे बैन, डोडा-अफीम और डीजे भी बंद, नियम तोड़ा तो 2.5 लाख जुर्माना

Rajasthan News: गुर्जर समाज में दाढ़ी वाले दूल्हे बैन, डोडा-अफीम और डीजे भी बंद, नियम तोड़ा तो 2.5 लाख जुर्माना

Rajasthan News: राजस्थान के पाली, जोधपुर, ब्यावर, जालोर और नागौर जिलों में रहने वाले गुर्जर समाज के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी खबर आई है। समाज की शादियों और गमी के कार्यक्रमों से फिजूलखर्ची और दिखावा मिटाने के लिए पंचों ने कड़े नियम बना दिए हैं। अब अगर किसी दूल्हे ने शादी में दाढ़ी बढ़ाई, तो उसकी खैर नहीं होगी। नियम तोड़ने पर सीधे ढाई लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना ठोक दिया जाएगा।

देवडूंगरी महापंचायत में पंचों ने लिया फैसला

यह पूरा मामला पाली जिले के सोजत इलाके का है। यहां देवडूंगरी में स्थित भगवान देवनारायण मंदिर परिसर में गुर्जर समाज की एक बहुत बड़ी महापंचायत बुलाई गई थी। इस बैठक में पांचों जिलों से भारी संख्या में पंच-पटेल और समाज के बड़े पदाधिकारी इकट्ठा हुए थे। समाज के बुजुर्गों ने बैठक में साफ कहा कि शादियों में बढ़ती दिखावेबाजी और गमी के वक्त होने वाले खर्चों ने गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है। इसीलिए अब पानी सिर से ऊपर जाने के बाद ये नए नियम सर्वसम्मति से पास किए गए हैं।

बिना क्लीन शेव नहीं चढ़ेगी बारात

शादियों को लेकर महापंचायत ने जो गाइडलाइन बनाई है, उसकी चर्चा पूरे राजस्थान में हो रही है। नए नियमों के मुताबिक ब्याह के समय दूल्हे का क्लीन शेव रहना बिल्कुल जरूरी कर दिया गया है। फैशन के चक्कर में दाढ़ी बढ़ाकर शादी करने पर पूरी तरह रोक है। शादी की बिंदौली (निकासी) में डीजे बजाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। पहरावनी और शगुन के लेन-देन में होने वाले अंधाधुंध खर्च को समेटते हुए इसकी अधिकतम सीमा सिर्फ 21 हजार रुपये तय कर दी गई है।

नशा तो खाना नहीं

अब समाज के किसी भी कार्यक्रम में डोडा, अफीम या शराब की मनुहार नहीं की जाएगी। सोजत रोड के सूत्रों के मुताबिक, अगर किसी ने गुपचुप तरीके से भी नशे का इंतजाम किया, तो समाज के लोग वहां खाना नहीं खाएंगे और पूरे कार्यक्रम का बहिष्कार कर देंगे। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवार पर 2 लाख 51 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।

मृत्युभोज में बनेगी सिर्फ लापसी

महापंचायत में बाल विवाह और मृत्युभोज जैसी पुरानी कुप्रथाओं को जड़ से खत्म करने पर भी बात हुई। फैसला हुआ कि किसी के निधन पर होने वाले 12वीं के कार्यक्रम को बिल्कुल सादा रखा जाएगा। वहां कोई वीआईपी मिठाई या पकवान नहीं बनेंगे। मिठाई के नाम पर सिर्फ पारंपरिक ‘लापसी’ ही बनाई जा सकती है। समाज के प्रबुद्ध जनों ने आह्वान किया है कि दिखावे के पैसों को बचाकर बच्चों की शिक्षा और रोजगार पर खर्च किया जाए।

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